में और मेरे अहसास - 33 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 33

Darshita Babubhai Shah मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी कविता

आहिस्ता बात रखा करो lसुनने वाले सुन लेगे lसमझने वाले समज लेगे ll ********************************************** आशिकी ये फिर ना दोबारा मिलेगी lजिंदगी ये फिर ना दोबारा मिलेगी ll ********************************************** बड़े नाजुकना अंदाज न रखो ए हुश्नो वालो lयहां ...और पढ़े


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