बैंगन - 22 Prabodh Kumar Govil द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

बैंगन - 22

Prabodh Kumar Govil मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी उपन्यास प्रकरण

वह ज़ोर से हंसा, पर और किसी को हंसी से नहीं आई। तब किसी ने कहा- तेरा जोक बेकार गया बे! वह खिसिया कर रह गया। उसने तो टीवी में देखा था कि "दाग अच्छे हैं" सो उसी धुन ...और पढ़े

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