रामचरितमानस-रत्नावली का मानस ramgopal bhavuk द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

रामचरितमानस-रत्नावली का मानस

ramgopal bhavuk मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी आध्यात्मिक कथा

4 रत्नावली का मानस रामगोपाल भावुक अस्थि चर्म मय देह मम, तामे ऐसी प्रीति। जो होती श्रीराम में, होत न तो भवभीति।। कर गह लाये नाथ तुम, बाजन वहु बजवाय। पदहु न परसाए तजत, रत्नावलि हि जगाय।। कटि ...और पढ़े

अन्य रसप्रद विकल्प