Bhiga badan nam aankhe book and story is written by Abha Yadav in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. Bhiga badan nam aankhe is also popular in Short Stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. भीगा बदन नम आँखें Abha Yadav द्वारा हिंदी लघुकथा 8.7k 3.2k Downloads 13.6k Views Writen by Abha Yadav Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण वह अकेली थी और वह तीन.सभी का बदन पानी में तर-बतर था.कपड़ों से पानी की बूंदें इस तरह टपक रही थीं ,जैसे पानी का टेप अधखुला रह गया हो. शाम का धुंधलका हो गया था. काले बादलों से घिरा आसमान रात होने का एहसास कराने लगा था.बारिश मूसलाधार हो रही थी. सड़क भी पानी से लबालब भरी थी.तेज हवा के साथ पेड़ मस्ती में झूम रहे थे.बारिश की बूंदें भी उनके साथ अठखेलियाँ कर रही थीं. वह पानी की बौछार से बचने के लिए बार-बार अपनी जगह बदल रही थी. उसने एकबार सड़क पर More Likes This नेहरू फाइल्स - भूल-113 द्वारा Rachel Abraham प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी