बेनाम शायरी - 4 Er Bhargav Joshi द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

बेनाम शायरी - 4

Er Bhargav Joshi मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी कविता

बेनाम शायरी?? ?? ?? ?? ?? ?? ??अपने वजूद को यूं बचाए रखकर समर नहीं छेड़ा जाता।"बेनाम" कुरबानी में सबसे पहले सर कटाना पड़ता है।।?? ?? ?? ?? ?? ?? ??कुछ अनजाने अनसुने ख्वाब चुने है हमने।कैसे कहे क्यों ...और पढ़े

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