बेनाम शायरी - 2 Er Bhargav Joshi द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

बेनाम शायरी - 2

Er Bhargav Joshi द्वारा हिंदी कविता

"बेनाम शायरी"??? ?? ??? ?? ???एक जमाना था कि लोग अपनों पे जान छिड़कते थे।एक ज़माना है कि लोग अपनो की जान छिड़कते है।।??? ?? ??? ?? ???ये तेरे अल्फाजों की पेहलिया हमें समझ नहीं आती।ये दिल की सारी ...और पढ़े