Nirmal book and story is written by Kumar Gourav in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. Nirmal is also popular in Moral Stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. निर्मल Kumar Gourav द्वारा हिंदी सामाजिक कहानियां 2.2k 2.4k Downloads 8.8k Views Writen by Kumar Gourav Category सामाजिक कहानियां पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण पिछले तीस सालों से वह पंचायत प्रधान थे। लोगों के सुख दुख में वे हमेशा शामिल रहते थे। कारण वे पहले दुख की व्यवस्था करते थे फिर उसे दुर करके सुख में बदल देते। शादी ब्याह जैसे आयोजनों में अवश्य पहुंचते थे। ये उनका जनसेवा का अपना स्टाइल था। उनका नाम माता पिता ने रामदेव रखा था लेकिन क्षेत्रीय भाषा का कलेवर चढ़ने से वे रामदेउ बन गये थे। यों पत्नी को चार बच्चे और सीओ साहब को रिश्वत छोड़कर, किसी को कुछ दिया नहीं । सुबह सुबह विडॉल मोबिल का डिब्बा संभाले मैदान की दिशा में रेल बने हुए थे More Likes This अंधविश्वास - अंधेरा नहीं, सोच बदलो - 1 द्वारा Kaushik dave टूटता हुआ मन - भाग 1 द्वारा prem chand hembram अदृश्य त्याग अर्द्धांगिनी - 3 द्वारा archana क्या सब ठीक है - 1 द्वारा Narayan Menariya अम्मा - 1 द्वारा Nandini Agarwal Apne Kalam Sein नफ़रत वाला पति, मोहब्बत वाली ज़िंदगी - 2 द्वारा Rameshvar Gadiya When Miracles Happen - 1 द्वारा fiza saifi अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी