bachcho ki jidd book and story is written by सोच कुमार in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. bachcho ki jidd is also popular in Short Stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. बच्चों की ज़िद सोच कुमार द्वारा हिंदी लघुकथा 1.2k 1.5k Downloads 6.3k Views Writen by सोच कुमार Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण "रोते रोते सो तो गया था मोहन! पर घर वापस जाते हीं फिर से हल्ला करेगा। छोटा सा बच्चा! कैसे समझाऊं उसे? पैसे भी तो नहीं है पास में!'' यही सब सोचते हुए श्यामा काम पर जा रही थी। तभी उसे याद आया कि नई मेम साहब का भी तो एक छोटा बेटा है। ''कितना खुशनसीब लड़का है! इतने बड़े घर में पैदा हुआ है। बहुत खुश रहता होगा! भगवान ऐसा भाग्य सबको दे।'' और फिर तभी मोहन उसके दिमाग में घूमने लगा। आंखें आंसुओं से भर गईं।''हाय बेचारा! उसकी एक भी फरमाइश पूरी नहीं कर सकी। कैसी मां हूं More Likes This मुक्त - भाग 14 द्वारा Neeraj Sharma पिता और अन्य कहानियाँ, भाग-1 द्वारा Anil Kundal Childhood Friends - Episode 3 द्वारा unknownauther सजा.....बिना कसूर की - 1 द्वारा Soni shakya प्रेरणास्पंदन - 2-3 द्वारा Bhupendra Kuldeep मंजिले - भाग 46 द्वारा Neeraj Sharma हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी