निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा... - 13 Anandvardhan Ojha द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा... - 13

Anandvardhan Ojha द्वारा हिंदी उपन्यास प्रकरण

काश, समुद्र का जल पीने लायक़ होता...ईश्वर सामान्य-जन से भिन्न होते हैं। भिन्न होते हैं, तभी तो ईश्वर होते हैं। मेरे मित्र ईश्वर भी उस कच्ची उम्र से ही थोड़े भिन्न थे। उन्होंने कोई व्यसन नहीं पाल रखा था, ...और पढ़े