निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा... - 10 Anandvardhan Ojha द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा... - 10

Anandvardhan Ojha द्वारा हिंदी उपन्यास प्रकरण

वह डाली तो अभी हरी थी....10 सप्ताहांत समीप आ गया था और मैं तीन दिनों के रतजगे और लेखा-विभाग में दिन के वक़्त आँखफोड़ अंक-व्यापार से क्लांत हो गया था। शनिवार की शाम की आतुर प्रतीक्षा थी, वह आ ...और पढ़े