इस कहानी में एक झुंड दारू के नशे में धुत्त होकर नाच रहा है, जिसमें रमेश सबसे आगे है और "सत्या बाबू की जै" के नारे लगा रहा है। सत्या, जो इस उत्सव में शामिल नहीं होना चाहता, बाहर आते हैं और लोगों का ध्यान खींचते हैं। भीड़ का कहना है कि सत्या ने उन्हें रतन सेठ के धोखे से बचाया है, जिससे वे खुश हैं। जब सत्या शराब पीने से मना करते हैं, तो रमेश उसे एक घूँट पीने के लिए मजबूर करता है। तभी मीरा, जो दारू के खिलाफ है, भीड़ में शामिल होकर उनके नाचने को रोकने की कोशिश करती है। वह दारू के दुष्परिणामों का जिक्र करती है और बताती है कि कैसे उसके पति गोपी को भी शराब ने मार दिया। वह और अन्य महिलाएं भीड़ को दारू पीने के बजाय बच्चों के लिए मिठाई और कपड़े लाने की सलाह देती हैं। मीरा के तर्कों से प्रभावित होकर, भीड़ धीरे-धीरे वहाँ से हटने लगती है। अंत में, रमेश और चँदू एक बार फिर दारू पीने में व्यस्त होते हैं, जबकि मीरा की चिंताओं का कोई असर नहीं होता। कहानी सामाजिक मुद्दों और दारू के नकारात्मक प्रभावों पर केंद्रित है। सत्या - 8 KAMAL KANT LAL द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 7k 3.5k Downloads 8.6k Views Writen by KAMAL KANT LAL Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण सत्या 8 दारू के नशे में धुत्त लोगों का एक झुँड ढोल बजाकर नाचता हुआ चला जा रहा था. सबसे आगे रमेश थिरक रहा था. बीच-बीच में ऊँची आवाज़ में वह नारा बुलंद करता था, “सत्या बाबू की जै.” जवाब में उसके साथ चल रही पूरी भीड़ एक स्वर में दोहराती थी, “सत्या बाबू की जै.” रमेश, “सत्या बाबू की जै.” भीड़, “सत्या बाबू की जै.” रमेश, “डिडिंग-डिडिंग, डिडिंग-डिडिंग...” शोर सुनकर सत्या कमरे का दरवाज़ा खोलकर बाहर बरामदे में निकल आया. देखते ही लोगों ने उसको घेर लिया और साथ में नचाने का प्रयास करने लगे. सत्या अपने को छुड़ाने Novels सत्या सत्या पहला पन्ना 1970 के दशक के प्रारंभ की बात है. तब मैं काफी छोटा था. एक दिन सुबह सवेरे मेरे पिता के एक जूनियर कुलीग हमारे घर पर आए और उन्होंने पूरे... More Likes This कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 1 द्वारा miss k त्रिवेणी: एक आदर्श बहू से बेकार बहू बनने तक का सफर - 1 द्वारा Triveni chakrdhari अनाथ - अध्याय 1 द्वारा Dev Kumar Rawat गायब - एक रात की कहानी - 1 द्वारा Patel Lay Starseeds - Part 1 द्वारा vyomatara Oyy Mr. Vampire - 1 द्वारा kusum kumari बारह बरश का इंतज़ार - 2 द्वारा kusum kumari अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी