मां का अंतिम समय  Ashish Dalal द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

मां का अंतिम समय 

Ashish Dalal मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी लघुकथा

‘बस। अब और नहीं होता मुझसे। परेशान हो गई हूं मैं।’ उसके अंतिम कौर मुंह में डालते ही जूठी थाली उसके सामने से उठाते हुए बड़बड़ाती वह बोली। बादल गरजने के लिए जैसे अनुकूल वातावरण तलाश रहे थे।‘हिम्मत और ...और पढ़े

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