यह कहानी एक महिला की जीवन यात्रा को दर्शाती है, जो विवाह के बाद अपने ससुराल में नई जिम्मेदारियों का सामना कर रही है। वह अपने परिवार और परंपराओं को निभाते हुए अपने पति और ससुरजी की सेवा में लग जाती है। उसका पति, अभय, उससे बहुत प्रेम करता है और उसकी हर जरूरत का ध्यान रखता है, जिससे वह बहुत संतुष्ट है। महिला अपने घर के कामकाज में व्यस्त रहती है और अपने ससुरजी के प्रति सम्मान और प्रेम महसूस करती है। उनकी शादीशुदा जिंदगी में सामंजस्य और प्यार है, लेकिन वह कभी-कभी अपने माता-पिता को याद करती है। कहानी में सिद्धेश, जो उसकी बातें सुन रहा है, उसके अतीत को समझने की कोशिश कर रहा है। इस प्रकार, यह कहानी स्त्री के संघर्ष और प्रेम की भावना को उजागर करती है। फ़ैसला - 3 Rajesh Shukla द्वारा हिंदी महिला विशेष 26.3k 5.1k Downloads 11.4k Views Writen by Rajesh Shukla Category महिला विशेष पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण उसके बाद तो उन घर की चाभियों ने तो मेरी जिन्दगी ही बदल दी। अब मैं बेटी से बहू बनने के इस दौर से गुजर रही थी। जहां पर स्त्री को मानसिक और शारीरिक अनेकों झंझावतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन इन सबके बाद भी अपने परिवार और कुल की परम्पराओं और जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी के साथ निभाना पड़ता है। फिर तो शादी के बाद मैं मात्र एकबार अपने अम्मा-पिताजी के घर गांव जा पायी। अम्मा भी मेरी जिम्मेदारियों को समझते हुए मुझे गावं बुलाने की जिद नहीं करती थीं। उनको पता था कि मेरी बेटी ससुराल में अकेली है इस लिए उसका रहना वहां अधिक जरूरी है। अगर सास या ननद होती तो बात ही और होती। जिम्मेदारियां थोड़ी-बहुत तो बंट ही जातीं। यही सब सोचकर मां ने भी समय से समझौता कर लिया था। मेरी क्या? मैं तो अब ससुराल की होकर रह गयी। लेकिन मेरा मन अब पति और ससुरजी की सेवा तथा घर के कामकाज में रमने लगा था। मेरी तो बस ससुराल ही दुनिया थी। Novels फ़ैसला जून का महीना। उफ! ऊपर से ये गरमी। रात हो या दिन दोनों में उमस जो कम होने का नाम नहीं ले रही थी। दिन की चिलचिलाती धूप की तपिस से रात को घर की दीवारें च... More Likes This एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर - 1 द्वारा Jyoti Prajapati चांदनी - 1 द्वारा Vandna Sharma ख़ाकी बिंदिया - भाग 1 द्वारा Shilpy Aggarwal फरामोश इश्क़ - 1 द्वारा Sakshi Rai अनामिका - 1 द्वारा Vandna Sharma भीड़ में अकेली - 1 द्वारा Alok Mishra झूठ का बोझ - भाग 2 द्वारा deepanshi garg अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी