"विद्रोहिणी" की इस कहानी में श्यामा एक पीड़ित महिला है, जिसका सामना चंद्रा नाम के एक दुष्ट व्यक्ति से होता है। चंद्रा ने उसे रोकने की कोशिश की और उसका हाथ पकड़ लिया, जिसके बाद श्यामा ने उसे चेतावनी दी लेकिन चंद्रा नहीं माना। अंततः, श्यामा ने अपने बचाव में चंद्रा के हाथ को काट लिया और वहां से भाग गई। कन्हैया, जो श्यामा का पति है, एक घायल स्थिति में था और जब वह घर लौटता है तो श्यामा के पड़ोसियों के साथ झगड़े का दृश्य देखता है। कन्हैया श्यामा को झगड़े से बचने की सलाह देता है, लेकिन श्यामा का मानना है कि अगर वे सामना नहीं करेंगे, तो लोग उन्हें परेशान करते रहेंगे। इस पर कन्हैया गुस्से में आकर श्यामा का सारा सामान बाहर फेंक देता है और घर का ताला लगाकर चला जाता है। श्यामा और उसके बच्चे भूखे-प्यासे सड़क पर बैठ जाते हैं और श्यामा एक नए सहारे की तलाश में निकल पड़ती है। कहानी श्यामा की कठिनाइयों और समाज के प्रति उसके विद्रोह की थीम को दर्शाती है। विद्रोहिणी - 9 Brijmohan sharma द्वारा हिंदी सामाजिक कहानियां 3.1k 3k Downloads 6.3k Views Writen by Brijmohan sharma Category सामाजिक कहानियां पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण ’दो तीन दिन से घायल कन्हैया बिस्तर पर दर्द से कराह रहा था। चौथे दिन कुछ स्वस्थ अनुभव करने पर वह सवेरे अपने काम पर निकल गया। उसके बाद श्यामा अपने काम पर निकल रही थी। उसने देखा कि रास्ते के बीच चंद्रा खडा था। चंद्रा ने अपने दोनों हाथ फैलाकर उसे रोकना चाहा । चंद्रा एक अत्यंत दुष्ट व्यक्ति था। वह लंबा चौड़ा विशालकाय पहलवाननुमा व्यक्ति था। वह श्यामा पर कुदृष्टि रखता था। अचानक उसने झपटते हुए श्यामा का हाथ पकड़ लिया। कुछ समय के लिए तो श्यामा हक्की बक्की रह गई I वह अपना हाथ छुड़ाने की कोशिस करते हुए बोली ‘ मेरे हाथ छोड़ दे वरना बहुत बुरा होगा। ’ Novels विद्रोहिणी (ऐक अकेली अबला, बेसहारा, बेबस ऐवम गरीब महिला का पाखंउी, जातिवादि, घोर साम्प्रदायिक संकीर्णतावाद से ग्रस्त समाज से संघर्ष की रोमाचक दास्तान । गरीबों के... More Likes This बांसुरी की धुन - भाग 1 द्वारा prem chand hembram राहें - 9 द्वारा shiromani mathur एक घरवाली, चार बाहरवाली द्वारा sukhvinder Singh Rai धर्मराज की सभा - 1 द्वारा prem chand hembram खोटा सिक्का - 1 द्वारा prem chand hembram कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 1 द्वारा miss k सूर्यकुल का सूर्यास्त - 1 द्वारा ALLA NOOR KHAN अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी