कहानी "मेरी प्रेम कहानी-मेड फॉर ईच अदर" एक फोन कॉल के इर्द-गिर्द घूमती है जिसमें 'रिया' नाम की एक महिला 'फ्लाना एण्ड ढीमका' बैंक से 'राजीव तनेजा' से बात कर रही है। रिया होम लोन की पेशकश करती है, लेकिन राजीव उसे तुरंत ही मना कर देता है। रिया उसे मनाने की कोशिश करती है और कहती है कि उनके बैंक का लोन लेने पर वह समय पर किश्त न चुका पाने की स्थिति में गुण्डों को उसके घर नहीं भेजेंगे। राजीव इस बात पर हंसते हैं और अपनी डरावनी अनुभवों को साझा करते हैं जब उसके दोस्तों और रिश्तेदारों ने उसके घर पर हंगामा किया था। रिया इस बात को मानती है कि ऐसे रिकवरी एजेंट अक्सर ग्राहकों को परेशान करते हैं और वह राजीव से मजाक करती है। बातचीत में दोनों के बीच हल्का-फुल्का मजाक चलता है, जिसमें रिया अपने नॉनवेज जोक्स का भी जिक्र करती है। कहानी में हंसी-मजाक और व्यंग्य का एक दिलचस्प मिश्रण है, जो बैंकों और लोन की प्रक्रिया को एक नये दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है। मेंरी प्रेम कहानी-मेड फॉर ईच अदर राजीव तनेजा द्वारा हिंदी हास्य कथाएं 2.5k 3.2k Downloads 10.5k Views Writen by राजीव तनेजा Category हास्य कथाएं पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण "मेरी प्रेम कहानी-मेड फॉर ईच अदर""हैलो"... "मे आई स्पीक टू मिस्टर राजीव तनेजा?" "यैस!...स्पीकिंग" "सर!..मैं'रिया' बोल रही हूँ 'फ्लाना एण्ड ढीमका' बैंक से" "हाँ जी!...बोलिए" "सर!...वी आर प्रोवाईडिंग होम लोन ऐट वैरी रीज़नेबल रेटस" "सॉरी मैडम!..आई एम नॉट इंटरैस्टिड" "सर!...बहुत अच्छी स्कीम दे रही हूँ आपको"... "हाँ जी!...बताएँ"..."सर!..हम आपको बहुत ही कम ब्याज पे लोन प्रोवाईड कराएँगे"... "अभी कहा ना आपको...कि नहीं चाहिए"..."सर!...पहले मेरी पूरी बात सुन लें..प्लीज़"..."अच्छा फटाफट बताएँ...मैंड्राइव कर रहा हूँ"...“जी..“एक मिनट रुको..मैं पहले ब्लूटुथ ऑन कर लूँ..सामने ठुल्ले खड़े हैं”..“जी!..“अब बोलिए..अब कोई दिक्कत नहीं है”..."सर!...आप अगर हमारे से लोन लेते हैं तो उसका सबसे बड़ा फायदा तो ये है कि समय पे किश्त ना चुका पाने More Likes This मजनू की मोहब्बत पार्ट-1 द्वारा Deepak Bundela Arymoulik मजनू की मोहब्बत द्वारा Deepak Bundela Arymoulik सैयारा का तैयारा द्वारा dilip kumar झग्गू पत्रकार (व्यंग सीरीज) द्वारा Deepak Bundela Arymoulik देसी WWE - गांव के पहलवान बनाम विलायती दंगल ! - 1 द्वारा sachim yadav कॉमेडी का तड़का - 1 द्वारा Kaju Check-In हुआ, Check-Out नहीं! - अध्याय 3 द्वारा Sakshi अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी