कहानी "परिणीता" में ललिता और शेखर का संवाद और भावनाएँ प्रमुखता से चित्रित की गई हैं। ललिता शेखर के कमरे में जाती है और उसके बक्से में सामान रखने लगती है। इसी दौरान, शेखर की उदासी और परेशान अवस्था ललिता को अचंभित कर देती है। शेखर का चेहरा ऐसा लगता है जैसे उसने कुछ खो दिया हो, और वह ललिता से पूछता है कि वह क्या कर रही है। ललिता उसे बताती है कि उसने उसके ओवरकोट को रख दिया है, जिसे उसने उसके लिए खासतौर पर बनवाया था। शेखर के चेहरे की चिंता और उसकी प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि वह किसी गंभीर मानसिक स्थिति में है। ललिता उसकी चिंता का कारण जानने की कोशिश करती है, लेकिन शेखर अपने भावनात्मक संकट को छिपाने का प्रयास करता है। कहानी में ललिता का स्नेह और शेखर की परेशानियाँ इस रिश्ते को और गहराई देती हैं। अंत में, शेखर अगले वर्ष के बारे में सवाल उठाता है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह अपने भविष्य के प्रति चिंतित है। यह संवाद उनके बीच की गहरी भावनात्मक स्थिति को दर्शाता है। परिणीता - 7 Sarat Chandra Chattopadhyay द्वारा हिंदी सामाजिक कहानियां 18.6k 9.7k Downloads 17.1k Views Writen by Sarat Chandra Chattopadhyay Category सामाजिक कहानियां पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण ललिता अपने विषय की बात होते देखकर वहाँ से चली आर्इ, और सीधे शेखर के कमरे में पहुंची। उसने शेखर के बक्स को खींचकर रोशनी में किया, और सभी कपड़े तथा आवश्यक सामान उसमें रखना शुरु किया। उसी समय शेखर भी वहाँ आ गया। शेखर के आते ही ललिता की दृष्टि उस पर पड़ी और वह एकाएक चक्कर में पड़ गर्इ, कुछ बोल न सकी। जिस प्रकार किसी मुकदमे का हारा मुवक्किल एकदम निर्जीव-सा हो जाता है, बोल नहीं पाता, उसकी सूरत बिगड़ जाती है, उसको पहचान सकना भी कठिन हो जाता है-ठीक वैसे ही हालत उस समय शेखर की थी। अभी एक घंटे में ही शेखर की मुखाकृति ऐसी बदल गर्इ थी कि ललिता उसे पहचान नहीं पा रही थी। न जाने कैसी उदासी और परेशानी शेखर के मुख पर छार्इ थी। मालूम होता था कि उसका सर्वस्व लुट चुका है। उसने कुछ भारी तथा सूखे स्वर में पूछा- ‘ललिता, क्या कर रही हो?’ Novels परिणीता विचारों में डूबे हुए गुरूचरण बापु एकांत कमरे में बेठें थे। उनकी छोटी पुत्री ने आकर कहा-‘बाबू! बाबू। माँ ने एक नन्हीं सी बच्ची को जन्म दिया है।’ यह शुभ... More Likes This फुटपाथ की ओर जीवन द्वारा Chandrika Menon इस घर में प्यार मना है - 5 द्वारा Sonam Brijwasi रामेसर की दादी - 1 द्वारा navratan birda देवर्षि नारद की महान गाथाएं - 1 द्वारा Anshu पवित्र बहु - 1 द्वारा archana ज़िंदगी की खोज - 1 द्वारा Neha kariyaal अधूरा इश्क़ एक और गुनाह - 1 द्वारा archana अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी