आखर चौरासी - 34 Kamal द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

आखर चौरासी - 34

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गुरनाम और विक्की जब भी घर पर होते हैं, उनकी शामें बस स्टैण्ड पर बने यात्री पड़ाव वाली सीमेंट की बेंच पर शुरु होती हैं। उस शाम भी वे दोनों वहीं बैठे बातें कर रहे थे। उनकी बातें विक्की ...और पढ़े