यह कहानी स्वराज के लिए युवा उत्साह और स्वतंत्रता संग्राम के समय की घटनाओं का वर्णन करती है। कहानीकार अमृतसर के दिनों को याद करते हैं, जब "इन्क़िलाब ज़िंदाबाद" के नारे हर जगह गूंजते थे। इस समय में एक विशेष जोश और उत्साह था, जो जलियांवाला बाग के दुखद हादसे के भय को मिटा रहा था। लोग बड़े पैमाने पर आंदोलनों में शामिल होते थे, गिरफ्तार होते थे और फिर जल्द ही रिहा हो जाते थे। कहानी में यह भी वर्णित है कि कैसे युवा लोग विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करने के लिए खादी पहनने की अपील करते थे, और लोग जोश में अपने कपड़े जलाने लगते थे। एक पात्र, शैखू, अपने सिले हुए कपड़े को जलाने के उत्साह में शामिल होता है, जबकि कहानीकार खुद को एक विद्रोही भावना से भरा हुआ महसूस करता है। कहानीकार स्कूल की पढ़ाई में रुचि खो चुका है और अधिकतर समय जलियांवाला बाग की गतिविधियों में बिताता है। वह वहां की रौनक और भीड़ का वर्णन करता है, साथ ही अपने भावनात्मक ख्यालों और आकांक्षाओं को भी साझा करता है। यह कहानी उस समय के सामाजिक और राजनीतिक माहौल को जीवंत और प्रभावशाली तरीके से चित्रित करती है। स्वराज के लिए Saadat Hasan Manto द्वारा हिंदी लघुकथा 17k 5.3k Downloads 20.3k Views Writen by Saadat Hasan Manto Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण मुझे सन याद नहीं रहा। लेकिन वही दिन थे। जब अमृतसर में हर तरफ़ “इन्क़िलाब ज़िंदाबाद के नारे गूंजते थे। इन नारों में, मुझे अच्छी तरह याद है, एक अजीब क़िस्म का जोश था.... एक जवानी.... एक अजीब क़िस्म की जवानी। बिलकुल अमृतसर की गुजरियों की सी जो सर पर ऊपलों के टोकरे उठाए बाज़ारों को जैसे काटती हुई चलती हैं.... ख़ूब दिन थे। फ़िज़ा में जो वो जलियांवाला बाग़ के ख़ूनीं हादिसे का उदास ख़ौफ़ समोया रहता था। उस वक़्त बिलकुल मफ़क़ूद था। अब उस की जगह एक बेख़ौफ तड़प ने ले ली थी.... एक अंधा धुंद जस्त ने जो अपनी मंज़िल से ना-वाक़िफ़ थी। Novels मंटो की चुनिंदा कहानियाँ नाज़िम जब बांद्रा में मुंतक़िल हुआ तो उसे ख़ुशक़िसमती से किराए वाली बिल्डिंग में तीन कमरे मिल गए। इस बिल्डिंग में जो बंबई की ज़बान में चाली कहलाती है, नि... More Likes This पढ़ाकू द्वारा Vandna Sharma कोन्निचिवा: माय देसी लव - 1 द्वारा Kajal Soam किराए का घर द्वारा Vandna Sharma First Love - 1 द्वारा Sah Ankita जिस जीवन में तुम थे - 2 द्वारा SHREYA INDUSHREE तुम्हें भी तो याद आती होगी - 1 द्वारा Anil Kundal मेरा साहित्य लेखन द्वारा Rakesh Kumar Sharma अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी