कहानी "सैलाब" में शबनम की जिंदगी एक मुश्किल दौर से गुजर रही है। उसके पिता का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो जाता है और अब घर की जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ जाती है। शतायु और पावनी उसकी मदद करते हैं, लेकिन शबनम पुरुषों से दूर भागती है क्योंकि उसने पहले एक बड़ा हादसा झेला है। शबनम केवल 19 साल की है और अपने छोटे भाई-बहनों के लिए उसकी जिम्मेदारी उसे मानसिक तनाव में डाल देती है। शतायु, जो उसकी स्थिति को समझता है, उसकी मदद करना चाहता है, लेकिन शबनम की नकारात्मकता और पुरुषों के प्रति उसके पूर्वाग्रह उसे दूर रखता है। शतायु दिनभर शबनम के बारे में सोचता है और उसे न्याय दिलाने की कोशिश करता है, लेकिन शबनम की बेरुखी उसे आहत करती है। वह उसके दुःख को समझता है, लेकिन उसके सामने आने में हिचकिचाता है। शबनम की स्थिति और उसके मन की गहराइयों को समझने की कोशिश में शतायु की मेहनत जारी रहती है। कहानी में शबनम की आंतरिक संघर्ष और उसके प्रति शतायु की निस्वार्थ भावना को उजागर किया गया है। सैलाब - 25 Lata tejeswar renuka द्वारा हिंदी सामाजिक कहानियां 2.4k 3.4k Downloads 10.1k Views Writen by Lata tejeswar renuka Category सामाजिक कहानियां पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण मुश्किल से शबनम की जिंदगी पटरी पर आने ही वाली थी किस्मत ने उसे फिर से जोरदार झटका दे दिया। दिल का दौरा पड़ने से उसके पिता का देहांत हो गया। घर की और उसके छोटे भाई बहन की जिम्मेदारी भी उसीके कंधे आन पड़ी। शतायु और पावनी से जितना हो सकता था मदद करते रहे। शतायु दिन में एक बार तो जरूर ही शबनम का हालचाल पूछने चला जाता था। उसकी सारी मुश्किलें शतायु अपने काँधे पर ले कर चलता था। शबनम को पुलिस स्टेशन और कोर्ट कचेरी ले जाने उसके साथ हर पल रहता था लेकिन शबनम किसी भी हालत में शतायु को अपने पास आने नहीं देती थी। उसके साथ हो चुके हादसे को शबनम भूल नहीं पा रही थी। इसलिए वह पुरुष को अपने आस पास बरदाश्त नहीं कर सकती थी। Novels सैलाब ये कहानी भारत के सबसे बड़े और दर्दनाक हादसे - भोपाल गैस कांड को केंद्रित करके लिखी गयी है। इस कहानी को मैने अपने पति को. तेजेश्वर जी के द्वारा प्रेरित... More Likes This मुक्त - भाग 13 द्वारा Neeraj Sharma मांई के मांई द्वारा Anant Dhish Aman हंटर - 2 द्वारा Ram Make अंधविश्वास - अंधेरा नहीं, सोच बदलो - 1 द्वारा Kaushik dave टूटता हुआ मन - भाग 1 द्वारा prem chand hembram अदृश्य त्याग अर्द्धांगिनी - 3 द्वारा archana क्या सब ठीक है - 1 द्वारा Narayan Menariya अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी