इस कहानी का पहला एपिसोड एक पुरस्कार समारोह के इर्द-गिर्द घूमता है, जहाँ 22 वर्षीय प्रिशा पटेल को "ऑनलाइन जर्नलिस्ट अवॉर्ड" से नवाजा जाता है। वह "सेनेटरी नेपकिन्स और गांव की महिलाओं में स्वच्छता" पर अपने लेख के लिए सम्मानित होती है। प्रिशा आत्मविश्वास के साथ स्टेज पर जाती है, जबकि उसकी सहेली दामिनी इस बदलाव को देखकर चकित होती है। दामिनी मीशा को बताती है कि पहले के समय में मासिक धर्म के विषय पर चर्चा करना भी शर्मनाक माना जाता था। वह अपनी दादी के समय को याद करती है, जब महिलाएं इस दौरान रसोई में नहीं जा सकती थीं और पानी मांगने में भी शर्म महसूस करती थीं। दामिनी यह भी बताती है कि आजकल स्थिति कितनी बदल गई है, जहां इस विषय पर फिल्में बनी हैं और यहां तक कि एक महिला को एयरपोर्ट पर सेनेटरी नेपकिन्स में ड्रग्स छिपाते हुए पकड़ा गया। कहानी में बदलाव, सामाजिक प्रगति और महिलाओं के अधिकारों की ओर इशारा किया गया है, जो पहले के समय की तुलना में आज की स्थिति को दर्शाता है। लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 1 Neelam Kulshreshtha द्वारा हिंदी सामाजिक कहानियां 3.8k 4.9k Downloads 9.2k Views Writen by Neelam Kulshreshtha Category सामाजिक कहानियां पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण ``ऑनलाइन जर्नलिस्ट अवॉर्ड गोज़ टु प्रिशा पटेल फ़ॉर हर राइट अप `यूज़ ऑफ़ सेनेटरी नेपकिन्स एन्ड हाइजीन इन वीमन ऑफ़ विलेजेज़। ``शी मीडिया के पुरस्कार समारोह में घोषणा होती है। बाईस वर्षीय प्रिशा पटेल आत्मविश्वास से स्ट्रेट लहराते बालों में पलाज़ो के ऊपर कुर्ती व उसके ऊपर पारदर्शी स्लीवलेस जैकेट पहने गहरी लिपस्टिक लगाए स्टेज की तरफ़ बढ़ती है। हॉल में अन्धेरा है लेकिन मंच की स्पॉट लाइट्स में प्रिशा के लम्बे ईयर रिंग्स चमक रहे हैं। दामिनी अपनी कुर्सी पर बैठी सकुचा जाती है। पुरस्कार वह भी` एम सी ``[मेंस्ट्रुएशन सायकल यानि स्त्रियों का मासिक धर्म ] के लिए उपयोग में आने वाले नेपकिन्स के लिये ? वह पास बैठी मीशा से धीमे से कहती है, ``ज़माना कितना बदल गया है। बरसों पहले `नेपकिन्स `क्या `एम सी`नाम भी पुरुषों के सामने नहीं लिया जाता था, चाहे वे घर के ही क्यों न हों। तब कोई सेनेटरी नेपकिन्स नाम जानता भी नहीं था। घर के पुराने कपड़ों को धोकर उपयोग में लाया जाता था। `` Novels लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम सहभागी लेखिकायें डॉ. सुधा श्रीवास्तव, डॉ. प्रणव भारती, नीलम कुलश्रेष्ठ, मधु सोसी गुप्ता, डॉ. मीरा रामनिवास, निशा चन्द्रा [अस्मिता, महिला बहुभाषी साह... More Likes This सूर्यकुल का सूर्यास्त - 1 द्वारा ALLA NOOR KHAN मुक्त - भाग 13 द्वारा Neeraj Sharma मांई के मांई द्वारा Anant Dhish Aman हंटर - 2 द्वारा Ram Make अंधविश्वास - अंधेरा नहीं, सोच बदलो - 1 द्वारा Kaushik dave टूटता हुआ मन - भाग 1 द्वारा prem chand hembram अदृश्य त्याग अर्द्धांगिनी - 3 द्वारा archana अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी