दीप शिखा - 2 S Bhagyam Sharma द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

दीप शिखा - 2

S Bhagyam Sharma द्वारा हिंदी प्रेम कथाएँ

बहुत साल पहले कहीं पढ़ी एक कविता उसके मरने के बाद उनको याद आई। वह उनके अन्दर आत्मध्वनि बन गूंजने लगी नीले आकाश की रात मन की याद फूल जैसे खिली है कौन मेरे मन के अन्दर बसी हुई जाने कौन?