रवि भाई ने रात को मुझे निशु के घर से ले जाने के लिए बुलाया। जैसे ही मैं नीचे आई, आंटी वहां नहीं थीं, जिससे मुझे थोड़ा अच्छा लगा क्योंकि मैं उनसे नजरें नहीं मिला पा रही थी। अवि को छोड़ने का मन नहीं कर रहा था, लेकिन मैं रवि भाई के साथ उनके घर चली गई। मैंने रवि भाई के माता-पिता को अपने माता-पिता की तरह मान लिया था। मैं अपने रूम में गई, जहां मुझे थोड़ी वॉमिटिंग हो रही थी। निशु ने मुझे अवि के रूम में जबरदस्ती खाना खिलाया, और रवि भाई ने दूध भी पिलाया, जिसके कारण मुझे नींद नहीं आ रही थी। अगले दिन मैं रवि भाई के साथ हॉस्पिटल गई, जहां निशु ने DNA टेस्ट के लिए मेरा ब्लड लिया। साकेत ने मेरे घर पैसे देने की कोशिश की, लेकिन मेरे माता-पिता ने पैसे लेने से मना कर दिया। मैंने तय किया कि मुझे लोन के पैसे खुद ही चुकाने होंगे और इसके लिए रवि भाई से बात करने का सोचा। घर जाकर मैंने अपने माता-पिता और रवि भाई से लोन के बारे में बात की। पापा ने मुझे एक ब्लैंक चेक दिया, लेकिन मैंने शर्त रखी कि उन्हें पैसे वापस लेने होंगे। मम्मी ने मुझसे कहा कि हमें अपने रिश्ते को बनाए रखना चाहिए। रवि भाई ने भी मम्मी की बात का समर्थन किया। दूसरे दिन हम बैंक गए और लोन का चेक भर दिया, जिससे मेरे मन का बोझ हल्का हो गया। दस दिन बाद, जब रिपोर्ट्स आने वाले थे, तब निशु ने मुझे अपने घर बुलाया। सभी रिपोर्ट्स का इंतज़ार कर रहे थे। जब रिपोर्ट देने वाला आया, तो निशु ने आंटी को रिसीव करने के लिए कहा। मनचाहा (अंतिम भाग) V Dhruva द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 168.4k 6k Downloads 13k Views Writen by V Dhruva Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण रात को रवि भाई मुझे निशु के घर से ले जाने आए थे। मै जब नीचे अाई तब आंटी जी वहा नहीं थे। यह देखकर मुझे थोड़ा अच्छा लगा। मै उनसे नज़रे नहीं मिला पा रही हूं। अवि को छोड़कर जाने का मन तो नहीं करता पर क्या करूं? मै रवि भाई के साथ उनके घर चली जाती हुं। मै अब रवि भाई के मम्मी पापा को मेरे मम्मी पापा ही मानती थी और कहती भी थी। वे दोनों हमारे आने तक सो गए थे। मै अपने रूम में चली जाती हुं। हर प्रेगनेंट लेडी की तरह मुझे भी वॉमोटिंग Novels मनचाहा जब से होश संभाला पापा को संघर्ष करते हुए देखा है मैंने। फिर भी मम्मी बिना किसी शिकायत के जिंदगी में साथ दें रहीं हैं। हम नोर्थ दिल्ली में रहते हैं। मे... More Likes This माइनर टाउन: जागरण - 3-4-5-6 द्वारा Ankit Saxena इश्क की पहली बारिश - 1 द्वारा Pooja RAJPUTANA - The War of Love and Revenge - 1 द्वारा Aarushi Singh Rajput पहला प्यार ? - 2 द्वारा Alone Soul माइनर टाउन: जागरण - 1-2 द्वारा Ankit Saxena सुनहरा फलक - 1 द्वारा Digvijay Singh Rathore खलनायिका के रूप में पुनर्जन्म - 1 द्वारा Shanaya khan अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी