पल जो यूँ गुज़रे - 13 Lajpat Rai Garg द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

पल जो यूँ गुज़रे - 13

Lajpat Rai Garg मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी सामाजिक कहानियां

जब निर्मल सिरसा पहुँचा तो रात हो गयी थी। सर्दियों की रात। कृष्ण पक्ष की द्वादश और कोहरे का आतंक। रिक्शा पर आते हुए तीव्र शीत लहर उसकी हडि्‌डयों को चीरती हुई बह रही थी। स्ट्रीट—लाईट्‌स भी जैसे कृपण ...और पढ़े

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