कहानी "पल जो यूँ गुज़रे" में निर्मल का घर लौटना और दीवाली का त्योहार मनाना प्रमुख विषय है। निर्मल तीन महीने बाद घर आया है और उसकी आईएएस परीक्षा में सफलता की उम्मीदें सभी को हैं। घर में त्योहार का माहौल है, जहाँ उसकी माँ सावित्री ने खास पकवान जैसे माल—पूड़े और खीर बनाए हैं। परिवार के सभी सदस्य, जैसे दादी और परमानन्द, उसे आशीर्वाद देते हैं। कहानी में निर्मल के पिता परमानन्द की शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों में रुचि को भी दर्शाया गया है। निर्मल की माँ उसे जितेन्द्र और उसकी पत्नी सुनन्दा को घर खाने पर बुलाने के लिए कहती हैं। जितेन्द्र ने बिना पूछे ही सुनन्दा को खाना इकट्ठे खाने के लिए बुला लिया। दूसरे दिन, जितेन्द्र और सुनन्दा निर्मल के घर आते हैं और दादी से आशीर्वाद लेते हैं। दादी सुनन्दा को पारंपरिक पंजाबी लहजे में आशीर्वाद देती हैं, जो परिवार के बीच प्रेम और संबंधों को दर्शाता है। यह कहानी परिवार के प्यार, त्यौहार की खुशी और संबंधों की गहराई को उजागर करती है। पल जो यूँ गुज़रे - 9 Lajpat Rai Garg द्वारा हिंदी सामाजिक कहानियां 12.5k 4.9k Downloads 11.8k Views Writen by Lajpat Rai Garg Category सामाजिक कहानियां पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण क्योंकि निर्मल ने पत्र द्वारा पहले ही सूचित किया हुआ था कि मैं दीवाली से चार दिन पूर्व आऊँगा, इसलिये कुछ तो दीवाली के कारण और कुछ उसके आने की खुशी में घर में त्योहार जैसा माहौल बना हुआ था। एक तो वह तीन महीने पश्चात् घर आया था, दूसरे आईएएस के लिये उसके पेपर बहुत अच्छे हुए थे। सब को आशा थी कि अब तो बहुत जल्दी ही भाग्य परिवर्तन होने वाला है। सावित्री ने उसके आने की खुशी में माल—पूड़े तथा खीर बनाई थी। दीवाली सिर पर थी, इसलिये गुड़ की और नमकीन मठियाँ भी बना रखी थीं। जब उसने घर पहुँचकर दादी और माँ के चरण—स्पर्श किये तो दोनों ने उसे बहुत आशीर्वाद दिये। दादी उसे अपने सीने से लगाकर बहुत देर तक उसके सिर पर हाथ फेरती रही। Novels पल जो यूँ गुज़रे अपना आखिरी पीरियड लगाने के बाद जैसे ही निर्मल ने डिपार्टमेंट से बाहर कदम बढ़ाये कि उसका सामना बेमौसम की बारिश की हल्की—हल्की बूँदों से हुआ। इसकी परवाह... More Likes This सूर्यकुल का सूर्यास्त - 1 द्वारा ALLA NOOR KHAN मुक्त - भाग 13 द्वारा Neeraj Sharma मांई के मांई द्वारा Anant Dhish Aman हंटर - 2 द्वारा Ram Make अंधविश्वास - अंधेरा नहीं, सोच बदलो - 1 द्वारा Kaushik dave टूटता हुआ मन - भाग 1 द्वारा prem chand hembram अदृश्य त्याग अर्द्धांगिनी - 3 द्वारा archana अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी