इस कहानी में संतोष श्रीवास्तव अपनी मुम्बई यात्रा और वहाँ के सांस्कृतिक अनुभवों का वर्णन करते हैं। वे मुम्बई में बसने के लिए आए थे, न कि केवल घूमने के लिए। जब वे जबलपुर में थे, उनके लेखन में परिपक्वता नहीं थी, लेकिन मुम्बई ने उनके लेखन को आकार दिया और पत्रकारिता में भी उन्हें अवसर दिए। मुम्बई में उनके कई दोस्त बने, और आज का साहित्यिक वर्ग उनके लिए महत्वपूर्ण है। कहानी में ग्राण्ट रोड और तेजपाल थियेटर का उल्लेख है, जहाँ संतोष ने कई नाटक देखे। उन्होंने गिरीश करनाड के "तुगलक" और सत्यदेव दुबे के "हयवदन" जैसे नाटकों का आनंद लिया। इन नाटकों ने उन पर गहरा प्रभाव डाला और उन्होंने नाटकों को नियमित रूप से देखने की आदत बना ली। तेजपाल थियेटर ने उन्हें नाटकों के प्रति एक नया दृष्टिकोण दिया, और यह अनुभव उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। मुम्बई ने उन्हें जीने और अपने लेखन को विकसित करने की प्रेरणा दी। आमची मुम्बई - 17 Santosh Srivastav द्वारा हिंदी यात्रा विशेष 631 2.7k Downloads 7.3k Views Writen by Santosh Srivastav Category यात्रा विशेष पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण मुम्बई मैं घूमने के लिए नहीं बल्कि यहीं बस जाने के लिएआई थी जब जबलपुर में थी तो कच्ची उमर के मेरे लेखन में प्रौढ़ता नहीं थी हालाँकि मेरी कहानियाँ तब भी बड़ी बड़ी पत्रिकाओं धर्मयुग, साप्ताहिक हिन्दुस्तान, ज्ञानोदय, सारिका, कहानीआदि में प्रकाशित हुई हैं लेकिन मेरे लेखन को प्रौढ़ता मुम्बई ने ही दी मुझे पत्रकारिता के लिए ज़मीन भी मुम्बई ने ही दी मुम्बई के फलक पर मेरे ढेरों दोस्त बने आज मुम्बई का पूरा साहित्यिक वर्ग मेरा दोस्त है नई पीढ़ी की युवा लेखिकाएँ मुझे अपना आदर्श मानती हैं और मैं उन्हें यथासंभव प्रमोट भी करती हूँ आज ये सब मेरीअंतरंग सहेलियाँ हैं मुम्बई ने मुझे जीना सिखाया, मुम्बई तुझे सलाम Novels आमची मुम्बई मेरे बचपन की यादों में जिस तरह अलीबाबा, सिंदबाद, अलादीन, पंचतंत्र की कहानियाँ और अलिफ़ लैला के संग शहर बगदाद आज भी ज़िंदा है उसी प्रकार पिछले सैंतीस वर्... More Likes This अकेली दुनिया - 1 द्वारा prashant raghav कांचा - भाग 2 द्वारा Raj Phulware अंतरा - भाग 1 द्वारा Raj Phulware संस्कृति का पथिक - 1 द्वारा Deepak Bundela Arymoulik सत्रह बरस की तन्हा कहानी - 1 द्वारा yafshu love कलकत्ता यात्रा (प्रथम संस्मरण ) द्वारा नंदलाल मणि त्रिपाठी वक़्त की क़ैद: ऐत-बेनहद्दू की दीवारों में जो दबा है - 1 द्वारा Tiths Empire अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी