बंद गले का ब्लाउज Dipak Raval द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

बंद गले का ब्लाउज

Dipak Raval द्वारा हिंदी लघुकथा

‘बंद गले का ब्लाउज’ -दीपक रावल (मूल गुजराती से अनुवाद – मदनमोहन शर्मा) बालूभाई कब से बेचैन थे. आज लीला ने क्यों देरी की होगी ?रोजाना तो समय से आ जाती है. शंका – कुशंकावश बेचैनी बढ़ रही थी. ...और पढ़े