दस दरवाज़े - 1 Subhash Neerav द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

दस दरवाज़े - 1

Subhash Neerav Verified icon द्वारा हिंदी सामाजिक कहानियां

घंटाभर चलकर बस रुकती है। मैं और राणा हैरान-से होकर उतरते हैं कि यह भला कौन-सी जगह हुई। बिल्कुल अनजान-सी। सोचते हैं कि कंडक्टर ने हमें सही जगह ही उतारा होगा। वह जानता था कि हमें बालमपुर जाना है। ...और पढ़े