गजल - वतन पर मिटने का अरमान डॉ अनामिकासिन्हा द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

गजल - वतन पर मिटने का अरमान

डॉ अनामिकासिन्हा द्वारा हिंदी कविता

" गरीब हूँ साहब" **************************"भीगे हुए अरमान आज रोने को है|मत रोको गरीबी को, पेट के बल भूखा मानव अब सोने को है"||"वक्त गुजर गए इंसान फरिश्ता न बन सका|रिश्ता खो गया कहीं, इंसानियत ताख पर ...और पढ़े