भाग 28 में, मुस्ताक और सूरज एक कॉफी शॉप में आमने-सामने हैं। सूरज सोचता है कि मुस्ताक बहुत कुछ जानता है, लेकिन वह सच कैसे जान सकता है। सूरज के मन में कई सवाल हैं, जैसे डी.के. और गुलाबो का संबंध, और तेजधार का अचानक आना। सूरज मुस्ताक से सच्चाई जानने की कोशिश करता है। जब सूरज तेजधार का नाम लेता है, तो मुस्ताक कुछ सच बताने लगता है। सूरज ने गुलशन और श्रीधर के प्यार की बात की, जिससे मुस्ताक ने अपनी पुरानी यादें शेयर कीं। मुस्ताक ने बताया कि वह गुलशन से प्यार करता था, लेकिन गुलशन श्रीधर को पसंद करने लगी थी। मुस्ताक ने उसे समझाने की कोशिश की थी कि उनका प्यार संभव नहीं है, लेकिन गुलशन ने उसे दोस्त मानकर प्यार की बातें छोड़ने को कहा। सूरज ने यह भी कहा कि मुस्ताक ने सुलेमान का सहारा लिया था, क्योंकि उसे पता था कि सुलेमान श्रीधर को डरा कर गुलशन को उससे दूर करेगा। मुस्ताक ने स्वीकार किया कि उसने सुलेमान के साथ नजदीकियाँ बढ़ाई थीं, क्योंकि वह चाहता था कि गुलशन उसकी हो जाए। सूरज धीरे-धीरे सच की ओर बढ़ रहा है और मुस्ताक के साथ बातचीत में कई नई जानकारियाँ सामने आ रही हैं। अच्छाईयां – २८ Dr Vishnu Prajapati द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 14.9k 3.2k Downloads 8.2k Views Writen by Dr Vishnu Prajapati Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण भाग – २८ मुस्ताक और सूरज दोनों आमने सामने थे | कुछ पल के लिए सूरज सोचने लगा की मुस्ताक बहुत कुछ जानता है मगर उससे सच का पता कैसे चलेगा ? गुलाबो के साथ डी.के. को देखकर भी कई सारे सवाल खड़े हो गए थे | डी.के. और गुलाबो क्यों साथ थे ? गुलाबो उससे साथ भी थी और उससे नफ़रत भी करती थी | मेरे पास करोडो के हीरे आये ही नहीं मगर ये सबको ये क्यूँ लग रहा है की वे अभी भी मेरे पास है..? तेजधार अचानक मेरी जिन्दगी में क्यों आया? डी.के., मुस्ताक या सुलेमान Novels अच्छाईयाँ लेखांक – १ मुंबई से रात को निकली बस की ये सवारी सुबह की पहली किरन के साथ अपने आखरी मुकाम तक पहुच चुकी थी शहर की भीड़ में बसने अपनी रफ़्तार कम कर ली थ... More Likes This यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai In to the unknown द्वारा Parakshtha यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी