भाग – २७ में सूरज तेजधार के शिकंजे में फंसता हुआ दिखाई देता है, जहां उसे समझ नहीं आता कि तेजधार उसे जानबूझकर फंसा रहा है या किसी साजिश का शिकार हो रहा है। गुलाबो से मिलने के बाद सूरज को यह अहसास होता है कि उसे करोड़ों के नायाब हीरे का पता लगाना आवश्यक है। वह सुलेमान के बारे में सोचता है, जो पहले डी.के. के लिए काम करता था और संभवतः अब तेजधार के साथ है। सूरज को कॉलेज के लिए जल्दी निकलना होता है, जहां उसे अपने पुराने दोस्तों से मिलना है। कॉलेज में झिलमिल उसे मिलती है, जो पहले की तरह नटखट नहीं रही, और दोनों के बीच मस्ती होती है। अन्य दोस्त भी आते हैं, और वे अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हैं। सरगम, निहाल, रज्जू, पावन और अन्य दोस्त एक साथ मिलकर संगीत का नया सप्तक बनाने का निर्णय लेते हैं। वे गुंजा और श्रीधर की याद में गाने की योजना बनाते हैं, यह कहते हुए कि संगीत उन्हें जोड़ता है और वे अपने देश की सांगीतिक धरोहर को महत्वपूर्ण मानते हैं। सूरज और उसके दोस्त पुराने पियानो पर मिलकर संगीत बनाने की तैयारी करते हैं, जो उनकी दोस्ती और संगीत की ताकत को दर्शाता है। अच्छाईयां – २७ Dr Vishnu Prajapati द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 13k 3k Downloads 6.5k Views Writen by Dr Vishnu Prajapati Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण भाग – २७ सूरज अब तेजधार के सिकंजेमें बुरी तरह से फंस रहा था | इन्स्पेक्टर तेजधार जानबूझ के ऐसा कर रहा था या वो सूरज को फ़साने की साजिस कर रहा था वो सूरज के लिए भी समझ पाना मुश्किल था | मगर गुलाबो के मिलने के बाद ये तय हो चूका था की सूरज को किसी भी हाल में वे करोडो के नायाब हीरे का पता लगाना बेहद जरुरी बन गया था | इसका राझ शायद ये तेजधार भी जान चूका होगा वरना वो मेरे पीछे क्यों पड़ा है ? सुलेमान जो सालो पहले डी.के. के लिए काम Novels अच्छाईयाँ लेखांक – १ मुंबई से रात को निकली बस की ये सवारी सुबह की पहली किरन के साथ अपने आखरी मुकाम तक पहुच चुकी थी शहर की भीड़ में बसने अपनी रफ़्तार कम कर ली थ... More Likes This यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai In to the unknown द्वारा Parakshtha यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी