कहानी "मुक्ति और भय" एक व्यक्ति की है जो पिछले 35 वर्षों से सरकारी कार्यालय में काम कर रहा है। वह अपनी मेहनत को बेकार होते देखता है और ईमानदारी की हार होते हुए महसूस करता है। हर महीने की तनख्वाह उन्हें इस व्यवस्था में बंधे रहने के लिए मजबूर करती है। घर लौटने पर, उन्हें परिवार का कोई सदस्य नहीं मिलता, सिवाय उनकी बगिया के, जो उन्हें जीवन ऊर्जा देती है। वह अपनी बगिया की देखभाल करने में समय बिताते हैं, और पौधों की नई कलियों से खुश होते हैं। लेकिन जब वह सेवानिवृत्त होते हैं, तो उनकी जीवन ऊर्जा में कमी आ जाती है। अचानक उनकी बगिया में घोंघों का आतंक छा जाता है, जो पौधों को नष्ट करने लगते हैं। शुरुआत में वह घोंघों को कुचलकर मारते हैं, लेकिन यह उपाय प्रभावी नहीं होता। फिर, वह घोंघों को एक बाल्टी में इकट्ठा कर उन पर नमक डालने लगते हैं, जिससे वे गलने लगते हैं। यह प्रक्रिया उन्हें एक अजीब आनंद देती है, जो उन्हें भय और मुक्ति के बीच में एक जटिल भावना में डाल देती है। कहानी इस संघर्ष को चित्रित करती है कि कैसे एक व्यक्ति अपनी जीवन ऊर्जा और संतोष को खोजता है, जबकि वह घोंघों के साथ अपनी बगिया की रक्षा करने की कोशिश करता है। मुक्ति और भय Shraddha Thawait द्वारा हिंदी लघुकथा 1.2k 1.9k Downloads 9.2k Views Writen by Shraddha Thawait Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण वह पिछले पैतीस वर्षों से रोज अपने ऑफिस में कलम घिसते आ रहे थे, इस आशा में कि यह घिसाई शायद किसी के हित का हेतु बन जाये, पर उनकी यह घिसाई फाइलों के लाल फीते से बंध कर रह जाती या किसी और की कलम घिसाई के नीचे दब जाती. वे रोज मजबूर लोगों को व्यवस्था की चक्की में पिसते देखते, ईमानदारी पर बेईमानी की जीत देखते. शाम तक उनकी जीवन उर्जा क्षीण हो उठती. उन्हें लगता कि वे अभी इसी वक्त इस व्यवस्था के मुंह पर अपना इस्तीफ़ा मार कर फिर कभी वापस न आने के लिए निकल जाएँ. इस दुर्दमनीय इच्छा के बावजूद हर महीने एक तारीख को मिलने वाला वेतन उनके क़दमों की गिरह बन जाता. More Likes This मुक्त - भाग 14 द्वारा Neeraj Sharma पिता और अन्य कहानियाँ, भाग-1 द्वारा Anil Kundal Childhood Friends - Episode 3 द्वारा unknownauther सजा.....बिना कसूर की - 1 द्वारा Soni shakya प्रेरणास्पंदन - 2-3 द्वारा Bhupendra Kuldeep मंजिले - भाग 46 द्वारा Neeraj Sharma हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी