यह कविता "कभी कभी खबरों में अजीब सी महक आती है" में देश की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति का वर्णन किया गया है। पहले भाग में, कवि ने स्वतंत्रता, राजभाषा, चुनावों और विकास के संकेतों का उल्लेख किया है। यह दर्शाता है कि कैसे देश में बदलाव आ रहे हैं, जैसे कि ईमानदारी, सेना की सहायता, और वैज्ञानिक उपलब्धियाँ। कवि ने विकास और प्रेम की भावना को भी उजागर किया है। दूसरे भाग में, कवि सत्ता के डर और जनता की भूमिका को दिखाता है। सत्ता के हिलने पर धरती और हवा की स्थिति का वर्णन किया गया है, और सीमाओं के जवानों की महत्ता को भी बताया गया है। तीसरे भाग में, कवि अपनी स्वतंत्रता और गति की इच्छा व्यक्त करता है। वह बहने और उड़ने की आकांक्षा रखता है, जो जीवन के अनुभवों का संदर्भ देती है। अगले भागों में, कवि राजनीतिक सच और झूठ के बीच के अंतर को दर्शाता है। व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से वह मानता है कि कबूतर की आवाज़ें शुभ और अशुभ की प्रतीक बन जाती हैं। कविता में अंत में शब्दों की शक्तियों और उनके मायने पर चर्चा की गई है, साथ ही यह भी बताया गया है कि सच और झूठ के बीच धुंध छाई हुई है। कुल मिलाकर, यह कविता राजनीतिक, सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन के विभिन्न पहलुओं को एक साथ लाने का प्रयास करती है। कभी कभी खबरों में अजीब सी महक आती है (मार्च २०१९) महेश रौतेला द्वारा हिंदी कविता 1.1k 1.9k Downloads 7.9k Views Writen by महेश रौतेला Category कविता पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण कभी कभी खबरों में अजीब सी महक आती है(मार्च २०१९)१.कभी कभी खबरों में अजीब सी महक आती है,जैसे देश स्वतंत्र हो गया हैउसकी अब अपनी राजभाषा हैजैसे चुनावों की घोषणा हो गयी है,जो सोचा नहीं था वैसा हो गया हैहमारे बीच कुछ व्यक्ति ईमानदार हो गये हैं,सेना बाढ़ में लोगों की सहायता कर रही है,सायबेरिया से कुछ पक्षियां झील पर आ चुकी हैं,हिमालय साफ दिख रहा है,भारत में नयी खोज हुई थीअंक यहीं खोजे गये थे,शून्य और दशमलव का आविष्कार हमारे पूर्वजों ने किया था,विज्ञान ने लम्बी छलांग लगायी है।कई खबरें हमें जीवन्त कर जाती हैंजैसे हम माता-पिता बन गयेहम More Likes This शब्द और सत्य - भाग 1 द्वारा Shivraj Bhokare मन के अल्फाज - ख्वाहिश की कविताएं। - 1 द्वारा khwahishh श्रीरामचरितमानस - भाग 1 द्वारा Shivam Kumar Pandey सादगी के स्वर : लेखिका गीता कुमारी - 1 द्वारा Geeta Kumari जिंदगी संघर्ष से सुकून तक कविताएं - 1 द्वारा Kuldeep Singh पर्यावरण पर गीत – हरा-भरा रखो ये जग सारा द्वारा Poonam Kumari My Shayari Book - 2 द्वारा Roshan baiplawat अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी