हिम स्पर्श - 68 Vrajesh Shashikant Dave द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

हिम स्पर्श - 68

Vrajesh Shashikant Dave Verified icon द्वारा हिंदी उपन्यास प्रकरण

68 “तुम्हारे आने की, तुम्हारे पदचाप की ध्वनि सुनाई नहीं दी। जीप की ध्वनि भी नहीं सुनाई दी। मुझे ध्यान ही नहीं रहा तुम्हारे आने का।“ जीत ने द्वार की तरफ देखा। जीप वहाँ खड़ी थी। “मैं कोई छुपते ...और पढ़े