वफ़ाई मन में कई योजनाएँ बना रही है। जीत, जो रोग और मृत्यु के डर से जूझ रहा है, जीवन की इच्छा रखता है और पहाड़ों पर जाना चाहता है। वफ़ाई को जीत के लिए कुछ करने के लिए कहा जाता है, लेकिन वह हिचकिचाती है। उसे बताया जाता है कि वह जीत को पसंद करने लगी है और उसका दिल जीत के लिए धड़क रहा है। वफ़ाई अपने दिल की धड़कनों को सुनती है और उन्हें "जीत" कहते हुए सुनती है, जिससे उसे अपने भावनाओं का अहसास होता है। वफ़ाई को सुझाव दिया जाता है कि वह जीत के साथ समय बिताए, उसकी इच्छाओं को समझे, और उसे जीवन की आशा दे। वह सोचती है कि वह अपने काम को अधूरा छोड़कर नहीं जा सकती, लेकिन उसे यह भी समझ में आता है कि जीत की जीवन की इच्छा को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। रातभर वह इस दुविधा में सोचती रहती है। सुबह, वफ़ाई जागती है और जीत के साथ नींबू सूप का आनंद लेती है। वह जीत की जीवन की आशाओं को देखकर खुश होती है और ठान लेती है कि वह उसके चेहरे पर खुशी बनाए रखेगी। वफ़ाई ने मन में निर्णय लिया कि वह जीत को कभी भी निराश नहीं होने देगी। हिम स्पर्श - 64 Vrajesh Shashikant Dave द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 7.4k 3k Downloads 8.9k Views Writen by Vrajesh Shashikant Dave Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण 64 वफ़ाई के मन में कई योजनाएँ आकार ले रही थी। रोग तथा मृत्यु से अधिक मृत्यु का भय और दिलशाद के द्वारा किया गया विश्वासघात जीत की समस्या है। जीत में जीवन अभी भी बाकी है। जीत अब जीना चाहता है। पहाड़ों पर जाना चाहता है। हीम से लड़ना चाहता है। उससे ही रोग की दवा भी चाहता है। तो तुम कुछ करो ना? मैं क्यूँ करूँ कुछ? इस क्यूँ का जवाब तो तुम भली भांति जानती ही हो। मुझ से क्यूँ पूछती हो? नहीं। बिलकुल नहीं जानती। तुम ही बताओ ना? देखो बता तो दूँ, किन्तु स्वीकार Novels हिम स्पर्श जब बर्फ की एक युवती मरुभूमि में एक युवक से मिलती है तो .. तो जो घटनाएँ घटती है , वह क्या है युवती तस्वीर पत्रकार है तो युवक चित्रकार। दोनों के बीच... More Likes This यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai In to the unknown द्वारा Parakshtha यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी