वफ़ाई और जीत एक मरुभूमि में चलते हैं। वफ़ाई ने जीत को चलने के लिए प्रेरित किया, यह कहते हुए कि साहस की जरूरत है। दोनों साथ-साथ चलते हैं और मरुभूमि की शांति को अनुभव करते हैं। वफ़ाई नींबू रस लाती है और दोनों ढलते सूरज को देखते हैं। वफ़ाई सकारात्मकता के साथ कहती है कि सूरज का ढलना एक नए दिन का संकेत है, जबकि जीत निराशावादी नजरिया अपनाता है। वफ़ाई जीत को चाँद की ओर इशारा करती है और उसे दिखाने की कोशिश करती है कि वहाँ एक छोटा सा दूज का चाँद है। जीत को पहले नहीं दिखता, लेकिन वफ़ाई के साथ खड़े होकर वह उसे देखता है और उसकी सुंदरता की सराहना करता है। वफ़ाई अपने बचपन की यादों को साझा करती है, जिसमें उसकी माँ उसे हर महीने दूज का चाँद दिखाती थी। दोनों के बीच हल्के-फुल्के मजाक और हंसी-मजाक का आदान-प्रदान होता है, दर्शाता है कि वे एक-दूसरे के साथ समय बिताने का आनंद ले रहे हैं। कहानी में जीवन, उम्मीद और सकारात्मकता के संकेत हैं, जो वफ़ाई के दृष्टिकोण से झलकते हैं। हिम स्पर्श - 63 Vrajesh Shashikant Dave द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 11.1k 3.3k Downloads 8.8k Views Writen by Vrajesh Shashikant Dave Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण 63 “उठो चलो, कहीं बाहर चलते है। कुछ अंतर साथ साथ चलते हैं।“ वफ़ाई ने कहा। “इस मरुभूमि में कहाँ जाएँगे हम?” “क्यूँ? मरुभूमि में नहीं चल सकते क्या? चलने के लिए रास्ता ही तो चाहिए।“ “चरण भी तो चाहिए।” “चरण तो सब के पास होते हैं, उसे उठाने का साहस चाहिए श्रीमान।“ “यह साहस कहाँ से आता है?” “मैं तो चली, तुम आ जाओ मेरे पीछे पीछे।“ वफ़ाई चल पड़ी। “अरे, रुको। मैं भी...।” जीत पुकारता रहा, वफ़ाई चलती रही। जीत ने गति बढाई, वफ़ाई के साथ हो गया। दोनों साथ साथ चलते रहे। मरुभूमि खाली थी, मौन Novels हिम स्पर्श जब बर्फ की एक युवती मरुभूमि में एक युवक से मिलती है तो .. तो जो घटनाएँ घटती है , वह क्या है युवती तस्वीर पत्रकार है तो युवक चित्रकार। दोनों के बीच... More Likes This यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai In to the unknown द्वारा Parakshtha यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी