उपन्यास "अपनी अपनी मरीचिका" का एक अंश 25 सितंबर, 1952 के दिन की कहानी है, जब मुख्य पात्र घर लौटता है और अपने माता-पिता को महासचिव पद का चुनाव जीतने की सूचना देता है। यह क्षण उनके लिए गर्व और खुशी का है, खासकर उसके माता-पिता के लिए। माता (अम्मा) की खुशी उसके भविष्य के लिए होती है, जिसमें वह केवल उसके सुख की कामना करती है, जबकि पिता (बाबा) ने अपनी अधूरी इच्छाओं की पूर्ति अपने बेटे में देखी है। बाबा ने स्वतंत्रता आंदोलन में अपने आपको खपाया था और विभाजन के बाद अपने लिए कुछ नहीं सोचा। उनके मन में एक अज्ञात आशा थी कि स्वतंत्रता के बाद देश उनके लिए कुछ करेगा, लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ, तो उन्होंने व्यक्तिगत स्वार्थ को प्राथमिकता दी। यह कहानी परिवार के त्याग, सपनों और आकांक्षाओं की गहराई को दर्शाती है, जिसमें माता-पिता अपने बच्चों के लिए अपने सपनों का बलिदान करते हैं और बच्चे अपने माता-पिता की अपेक्षाओं पर खरे उतरने की कोशिश करते हैं। अपनी अपनी मरीचिका - 11 Bhagwan Atlani द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 3.1k 2.5k Downloads 7.5k Views Writen by Bhagwan Atlani Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण गुलाल से सराबोर, थकान से चूर, विजय से उल्लसित और नवप्रदत्त दायित्वों के बोझ से दबा कुछ देर पहले घर लौटा हूँ। अम्मा और बाबा के चरण स्पर्श करके उन्हें महासचिव पद का चुनाव जीतने की सूचना दी तो दोनों ने बाँहों में लेकर मेरा मस्तक चूम लिया। मेरे सिर और बालों में अटा गुलाल अम्मा और बाबा को भी रंगीन बना गया। हम तीनों ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे। विभाजन के केवल पाँच साल बाद बेटा समाज के बुद्धिमान तबके की भावी नाक माने जाने वाले समूह का सिरमोर बनकर आया है, यह इबारत मैं बाबा की आँखों में भली भाँति पढ़ पा रहा था। अम्मा की आँखें, उसका मुखमंडल, उसका अंग-अंग शुद्ध प्रसन्नता से दमक रहा था, किंतु बाबा की आँखों में प्रसन्नता से अधिक गौरव था। Novels अपनी अपनी मरीचिका शायद ही कोई ऐसा धंधा करने वाला दुकानदार होगा जिसे लोग कई नामों से पुकारते हों। उसे हेय दृष्टि से देखते हों। नाम सुनकर मुँह बिचका देते हों। लेकिन मेरे... More Likes This Beyond the Pages - 1 द्वारा cat रूहों का सौदा - 1 द्वारा mamta लाल पत्थर का राज - भाग 1 द्वारा Anil singh जागती परछाई - 3 द्वारा Shivani Paswan विलनेस का पुनर्जन्म अब बदला होगा - 1 द्वारा KahaniCraft वासना दैत्य ही वासना देव है! - 1 द्वारा Krayunastra THE PIANO MEN - 1 द्वारा rajan अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी