"निश्छल प्रेम" एक कहानी है जिसमें जया, एक सफल आईआरएस अधिकारी, अपने जीवन में असंतोष और उदासी का अनुभव कर रही है, जबकि वह अपने बचपन के प्यार राघवेंद्र की यादों में खोई हुई है। जया और राघवेंद्र गाँव के साथी थे, जिन्होंने अपने बचपन में एक-दूसरे के प्रति निश्चल प्रेम का अनुभव किया था। एक दिन, जया ने राघवेंद्र को उसकी खूबसूरती और प्रतिभा के लिए प्रशंसा की, जिसके बाद राघवेंद्र ने उसे अपनी बाहों में भर लिया और अपने प्यार का इजहार किया। लेकिन उनके प्यार के इस खूबसूरत पल को जया के चचेरे भाई अमरीश ने बाधित कर दिया, जिसने राघवेंद्र को पीटकर घर ले जाकर उसे रस्सियों से बांध दिया। जगमेर, जो अमरीश का परिवार था, ने सोचा कि राघवेंद्र को मारकर इस घटना को खत्म कर दिया जाए। लेकिन सुमति, राघवेंद्र की माँ, ने यह नहीं सहा और राघवेंद्र के पिता भोला दत्त शास्त्री को लेकर आई। उन्होंने जगमेर से राघवेंद्र की जान की भीख मांगी। अंततः जगमेर ने कुछ शर्तों पर राघवेंद्र को छोड़ दिया, और सुमति ने भोला दत्त को थोड़े पैसे दिए। इसके बाद, राघवेंद्र और उसका परिवार कहीं चले गए, जबकि जया अपने निश्चल प्यार की यादों में खोई रही। यह कहानी प्रेम, बलिदान और सामाजिक संघर्षों को दर्शाती है, जहाँ प्रेम की निश्चलता को बाहरी परिस्थितियों से चुनौती मिलती है। निश्छल प्रेम Ved Prakash Tyagi द्वारा हिंदी लघुकथा 38.6k 1.9k Downloads 7.3k Views Writen by Ved Prakash Tyagi Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण निश्छल प्रेम “बेटा तू खुश तो है ना अपनी नौकरी से?” माँ मेरठ के एक छोटे से गाँव से पुणे में बात कर रही थी, कुछ ही दिन पूर्व बेटी ने आइ आर एस की परीक्षा प्रथम स्थान पाकर सफल की थी, तभी उसको दक्षिण रेलवे में नियुक्ति मिली, दक्षिण रेलवे का पुणे जंक्शन ही सबसे निकट था अतः पुणे का स्टेशन मिल गया। सरकारी बंगला रहने के लिए, बड़ा सा कार्यालय, कार्यालय के विभिन्न कार्यों हेतु अलग अलग कर्मचारी और सभी सुख सुविधाएं, फिर भी........ “माँ मुझे यहाँ पर सब कुछ मिला लेकिन पता नहीं क्यों मेरा मन उदास More Likes This तुम्हें भी तो याद आती होगी - 1 द्वारा Anil Kundal मेरा साहित्य लेखन द्वारा Rakesh Kumar Sharma अलविदा आनंद! द्वारा Devendra Kumar आग और ठहराव - 1 द्वारा Alka rahul Aggarwal क्या सब ठीक है - 5 द्वारा Narayan Menariya बारह बरश का इंतज़ार - 1 द्वारा kusum kumari कालू की पहाड़ी - 1 द्वारा RAAHULL SHARMA अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी