चंदा फुलारा एक स्वतंत्र लेखिका हैं, जिनका जन्म 31 मार्च को हुआ और उन्होंने हिंदी में एम.ए. की पढ़ाई की है। उनकी कविताएँ विभिन्न हिंदी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी कविता "मेरी माँ" माँ के प्रति असीम प्रेम और समर्पण को दर्शाती है। माँ की ममता, कठिनाइयों का सामना करने की क्षमता और बच्चों के प्रति उनकी दुआओं का उल्लेख किया गया है। चंदा ने माँ की भूमिका को बहुत गहराई से चित्रित किया है, जिसमें वह दुखों को दूर करने वाली, प्यार देने वाली और हमेशा साथ रहने वाली बताई गई हैं। कविता "अजन्मी औलाद" में चंदा अपनी अजन्मी बेटी के प्रति अأسमर्थता और दर्द को व्यक्त करती हैं। वह उस भ्रूण को महसूस करती हैं जिसे वह जन्म नहीं दे सकीं और इसे अपने जीवन का एक बड़ा दुख मानती हैं। यह कविता मातृत्व और नारी के प्रति समाज की अपेक्षाओं के बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर करती है। "प्यारी माँ" शीर्षक वाली कविता में चंदा माँ की महिमा और उनके बलिदान को समझने की कोशिश करती हैं। वे माँ के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करती हैं और इस बात पर अफसोस करती हैं कि वे अपनी माँ के एहसानों को पहचान नहीं पाईं। "सिमरी" एक छोटी लड़की की कहानी है, जो अपने घर में दुर्व्यवहार का शिकार होती है। सिमरी की दयनीय स्थिति, उसकी मासूमियत और अपने परिवार के प्रति उसकी जिम्मेदारियाँ दर्शाई गई हैं। यह कहानी समाज में बच्चे के अधिकारों और उनके प्रति हो रहे अत्याचारों पर ध्यान केंद्रित करती है। इन सभी रचनाओं में चंदा फुलारा ने नारी, मातृत्व और समाज के विभिन्न पहलुओं को संवेदनशीलता के साथ उजागर किया है। Kavita Chanda fulara द्वारा हिंदी लघुकथा 4.9k 1.8k Downloads 6.9k Views Writen by Chanda fulara Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण चंदा फुलारा जन्मतिथिः 31 मार्च शिक्षाः एम.ए.;हिंदी संप्रतिः स्वतंत्र लेखन हिंदी की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मे कविताएँ प्रकाशित।संपर्कः ई-90 सैक्टर-72 नोएडा 110077मो.- 9711221294 मेरी माँखून से सींचती, आँखें मिचती,करती है दुआ मेरी माँ।अंधेरी रातों में, दुख भरी बातों में,करती है सवेरा मेरी माँ।शब्दों की गहराई, ईश्वर की परछाई,बनी है मेरी माँ।दुखों के जंगल में,समस्याओं के दगंल से,निकाल देती है मेरी माँ।नफरतों को तोड़कर, दिलों को जोड़कर,रख देती है मेरी माँ।ममता की गहराई माँ में है समाई,बहुत प्यार लुटाती है मुझ पर मेरी माँ।मुश्किलों की घड़ियों में, खुशियों की लड़ियों में,साथ देती है हर पल मेरी माँ।ज़िंदगी से बढ़कर, कठिनाइयों से लड़कर,मुझे चाहती More Likes This क्या सब ठीक है - 5 द्वारा Narayan Menariya बारह बरश का इंतज़ार - 1 द्वारा kusum kumari कालू की पहाड़ी - 1 द्वारा RAAHULL SHARMA खामोश बेटी - 1 द्वारा blue sky and purple ocean मुक्त - भाग 14 द्वारा Neeraj Sharma पिता और अन्य कहानियाँ, भाग-1 द्वारा Anil Kundal Childhood Friends - Episode 3 द्वारा unknownauther अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी