बेचारे पुरुषों का दर्द कौन समझे ? Mangi द्वारा पत्रिका में हिंदी पीडीएफ

बेचारे पुरुषों का दर्द कौन समझे ?

Mangi द्वारा हिंदी पत्रिका

मैं जैसे ही ऑफिस में लंच के लिए बैठा तो फोन रनकने लगा ! देखा तो, बॉस का कॉल ।अरे, उसे कॉल क्यो कहु ? आफ़त की पुड़िया कहु तो ही बेहतर होगा । सुबह में ...और पढ़े