हिम स्पर्श 47 Vrajesh Shashikant Dave द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

हिम स्पर्श 47

Vrajesh Shashikant Dave मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी उपन्यास प्रकरण

47 “गाँव को छोड़ने के पश्चात पहली बार किसी पर्वत को देख रही हूँ। हे काले पर्वत, तुम अदभूत हो।“ वफ़ाई काले पर्वत से मोहित हो गई। वह किसी भिन्न जगत में चली गई। जीत ने उसे उस ...और पढ़े