इस लेख में साहित्य और फिल्मों के बीच के संबंध पर चर्चा की गई है। लेखक बताते हैं कि दोनों विधाएँ अलग होते हुए भी समाज के प्रति समान दर्पण पेश करती हैं। साहित्य अक्सर शिक्षित वर्ग तक सीमित होता है, जबकि फिल्मों का प्रभाव व्यापक होता है, जिससे दोनों वर्गों तक पहुंचा जा सकता है। जब साहित्य को फिल्म के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो उसका मूल संदेश अधिक लोगों तक पहुँचता है, जिससे वह रचना सफल होती है। हॉलीवुड और भारतीय सिनेमा में भी साहित्यिक रचनाओं पर आधारित फिल्में बनाई जाती हैं। साहित्य और फिल्मे ARYAN Suvada द्वारा हिंदी पत्रिका 7.3k 3k Downloads 11.5k Views Writen by ARYAN Suvada Category पत्रिका पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण हॉलीवुड एवं भारतिय सिनेमा में समय समय पर साहित्य की रचनाओ पर फिल्मे बनी है । भारतिय सिनेमा में शुरुआती दौर में साहित्यक कृति पर कई फिल्में बनी पर कुछ ही फिल्मे सफल हुई और बाकियो का हश्र देखके फ़िल्मकारो ने साहित्य पर फिल्में बनाना ही छोड़ दिया , पर बीच बीच में एक दो फिल्में साहित्य पर आ ही जाती है । हॉलीवुड में बॉलीवुड से एकदम विपरीत हुआ वहां पर आज भी ज्यादातर फिल्मे किसी न किसी उपन्यास या कहानी पर आधारित होती है और वे प्रचलित और व्यवसायीक रूप से कामयाब भी होती है जैसे “जे .के. More Likes This Rajkumar - 2 द्वारा Ram Make Hero - 8 द्वारा Ram Make Star Sentinals - 1 द्वारा Ravi Bhanushali Vulture - 1 द्वारा Ravi Bhanushali नेहरू फाइल्स - भूल-85 द्वारा Rachel Abraham इतना तो चलता है - 3 द्वारा Komal Mehta जब पहाड़ रो पड़े - 1 द्वारा DHIRENDRA SINGH BISHT DHiR अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी