इस कहानी में दिल की गहरी भावनाओं और दर्द का वर्णन किया गया है। पहले भाग "ज़ख़्म" में, लेखक अपने दिल के जख्मों को साझा करता है, जहां वह बताता है कि उसने जो खोया है, वह कभी उसका नहीं रहा और लोग उसकी भावनाओं का मजाक उड़ाते रहे हैं। दूसरे भाग "वक़्त" में, लेखक अपने प्रेमी के गुस्से को लेकर अपनी मोहब्बत और नफरत की जटिलता का वर्णन करता है। वह बताता है कि कैसे समय ने उसके दिल को तोड़ा और अब उसे उस व्यक्ति से नफरत हो गई है। "आना" में वह अपने प्रिय के आगमन को एक विध्वंसकारी अनुभव मानता है, जो उसकी पहचान को प्रभावित करता है। लेखक यह समझता है कि कुछ लोग खोकर भी नहीं मिलते हैं, और उसके जीवन में फिर से खुशियों का आना एक नई उम्मीद है। "उलझने" में वह अपने जीवन की उलझनों को सुलझाने की कोशिश करता है, जबकि "इंतज़ार" में वह अपने प्रिय के लौटने का इंतजार करता है, जानकर भी कि वह अब उसका नहीं है। "छोड़ कर" में वह अपने प्रिय से कहता है कि उसे अकेला छोड़ने की कोशिश न करे, क्योंकि कोई भी उसकी तरह नहीं होगा। "आईना" में वह अपने अस्तित्व को एक आईने की तरह देखता है, जो अपनी सच्चाई को दर्शाता है। अंत में, "अँधेरे रास्ते" में वह अपने अपनों और गैरो से मिले दुखों का जिक्र करता है, और यह समझता है कि कभी-कभी अपने लोग ही सबसे ज्यादा चोट पहुँचाते हैं। वह अपने अतीत की यादों में खोया है और समय की बेवफाई का अनुभव करता है। कुल मिलाकर, यह कहानी प्यार, दर्द, और समय की प्रभावशीलता के बारे में गहन विचारों को प्रस्तुत करती है। उम्मीद SARWAT FATMI द्वारा हिंदी लघुकथा 16.7k 2.4k Downloads 8.7k Views Writen by SARWAT FATMI Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण कभी अपनों ने तो कभी गैरो ने दिल दुखायी है मेरी गैर तो फिर भी गैर थे बिखरने की नौबत तब आयी जब अपनों ने आईना दिखाया गम को छुपाते छुपाते वक़्त कही और ही चल गया और में वही अपनों के इंतेज़ार में बैठी रह गयी भीड़ में जब कभी आवाज़ आती हैँ तो लगता हैँ सायद किसी अपनों ने पुकारा हैँ मुझे पर वेहम भी अजीब हैँ ना ?. सरवत मत भाग उस रास्ते में जो कभी तेरा हुआ करता था वरना अँधेरे में घूम होकर रह जाएगी और लोग तुझे भूल जायेंगे कुछ पल कुछ पल तेरे साथ गुज़ारा वो गुज़ारे पल यू मेरी ज़िन्दगी मे उतर जाएगा More Likes This मुक्त - भाग 14 द्वारा Neeraj Sharma पिता और अन्य कहानियाँ, भाग-1 द्वारा Anil Kundal Childhood Friends - Episode 3 द्वारा unknownauther सजा.....बिना कसूर की - 1 द्वारा Soni shakya प्रेरणास्पंदन - 2-3 द्वारा Bhupendra Kuldeep मंजिले - भाग 46 द्वारा Neeraj Sharma हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी