सुहानी और रोहित के बीच की बातचीत खत्म हो चुकी थी, लेकिन सुहानी रोहित की यादों से पूरी तरह से निकल नहीं पाई थी। उसने इमरान के साथ एक नया रिश्ता शुरू किया है, लेकिन रोहित के साथ बिताए दो साल को भुलाना आसान नहीं था। सुहानी अपनी नौकरी में व्यस्त रहती है और छुट्टियों में घर आती है। इराही के काम से सभी खुश हैं और सुहानी ने वहां कई दोस्त बना लिए हैं। इमरान से मिलने के लिए सुहानी उसके घर जाती है, जहां वे प्यार भरी बातें करते हैं। सुहानी इमरान की खुशी में खुश रहती है, और वे शादी के बाद की योजनाओं पर चर्चा करते हैं, हालांकि उनके रिश्ते के बारे में किसी को नहीं पता। सुहानी अपने छोटे भाई हैरी की पढ़ाई में भी मदद करती है और अपने माता-पिता के ताने सहती है। जब सुहानी ने इमरान से अपने रिश्ते के बारे में घर में बताने की बात की, तो इमरान ने कहा कि अभी नहीं, पहले उसे सेटल होने दो। इसके चलते सुहानी चुप रही, लेकिन उसके माता-पिता उसे शादी के लिए दबाव डालने लगे। सुहानी शादी के बंधनों से दूर रहना चाहती है और अपने सपनों को पूरा करना चाहती है। अंत में, सुहानी के माता-पिता ने उससे बात करना बंद कर दिया, और सुहानी ने कई प्रयास किए, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। अब सुहानी के पिता उसके साथ रहने लगे हैं और उन्होंने एक दिन अपने बड़े भाई को सुहानी के पास लाने का निर्णय लिया। बेगुनाह गुनेहगार 7 Monika Verma द्वारा हिंदी लघुकथा 18.9k 3.1k Downloads 7.1k Views Writen by Monika Verma Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण सुहानी और रोहित के बीच की बातचीत बांध हो चुकी थी। और इमरान के साथ जैसे हमसफर मिल चुका हो ऐसे सुकून मिल चुका था। लेकिन रोहित की यादों से दूर नही हुई । कैसे भूल पाती। दो साल से साथ जो थे।सुहानी छुटियो में घर आती है। बाकी समय अपनी जॉब पर रहती है। इराही के काम से हर कोई खुश है। यहां भी उसने अपनेपन के स्वभाव से कई दोस्त बना लिए है। मर्दो से थोड़ा दूर रहती है। सबकी मदद करती है।कोई ऊपरी अधिकारी उसकी गलती बताता तो उसे मानकर उसे सुधारने की कोशिश करती है। सुहानी Novels बेगुनाह गुनेहगार सुहानी। एक प्यारी सी लड़की। जो अपने ख्यालो से इस दुनिया को देखती है, समझती है। जिसे संभव असंभव, मुमकिन नामुमकिन, मुश्किल आसान का फर्क समझ नही आता। जो क... More Likes This नेहरू फाइल्स - भूल-113 द्वारा Rachel Abraham प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी