यह कहानी कबीर की संवेदनशीलता और समाज की समस्याओं के प्रति उसकी चिंता को दर्शाती है। नगर में यह घोषणा की गई कि जो भी भीख मांगेगा, उसे गिरफ्तार किया जाएगा। लोग इस फैसले पर खुश थे, लेकिन कबीर को इस पर आंसू आ गए। उसने बताया कि कपड़ा ताने और पीटे से बनता है, लेकिन गिरफ्तारियों के चलते लोगों के पेट भरने का साधन कहाँ है? कबीर ने एक एम ए, एल एल बी से भी दुख व्यक्त किया, जिसने कई खड़ियाँ (सामग्री) अलॉट की थीं। कबीर ने कहा कि कानून उसे यह समझाता है कि खड़ियाँ छोड़कर धागा बेचना बेहतर है, लेकिन यह खटखट ही उसकी जीविका है। फिर कबीर ने एक किताब के लिफाफों पर भगत सूरदास की कविता देखी और उसकी बेइज़्ज़ती पर रो पड़ा। लिफाफे बनाने वाला हैरान था और कबीर ने उसे बताया कि सूरदास एक भगत हैं, और उनकी कृतियों का अपमान नहीं होना चाहिए। यह कहानी कबीर की गरिमा और समाज के अन्याय के प्रति उसकी संवेदनशीलता को उजागर करती है। देख कबीरा रोया Saadat Hasan Manto द्वारा हिंदी लघुकथा 42k 5.4k Downloads 27.2k Views Writen by Saadat Hasan Manto Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण नगर नगर ढिंडोरा पीटा गया कि जो आदमी भीक मांगेगा उस को गिरफ़्तार कराया जाये। गिरफ्तारियां शुरू हुईं। लोग ख़ुशियां मनाने लगे कि एक बहुत पुरानी लानत दूर होगई। कबीर ने ये देखा तो उस की आँखों में आँसू आगए। लोगों ने पूछा। “ए जूलाहे तो क्यों रोता है?” कबीर ने रो कर कहा। “कपड़ा दो चीज़ों से बनता है। ताने और पीटे से। गिरफ़्तारीयों का ताना तो शुरू होगया पर पेट भरने का पीटा कहाँ है?” एक एम ए, एल एल बी को दो सौ खडियाँ अलॉट होगईं। कबीर ने ये देखा तो उस की आँखों में आँसू आगए। एम ए एल एल बी ने पूछा। “ए जूलाहे के बच्चे तु क्यों रोता है?...... क्या इस लिए कि मैंने तेरा हक़ ग़सब कर लिया है?” Novels मंटो की श्रेष्ठ कहानियाँ - 2 दो तीन रोज़ से तय्यारे स्याह उक़ाबों की तरह पर फुलाए ख़ामोश फ़िज़ा में मंडला रहे थे। जैसे वो किसी शिकार की जुस्तुजू में हों सुर्ख़ आंधियां वक़तन फ़वक़तन किसी... More Likes This चुन्नू और मुन्नू - एक खट्टी-मीठी दोस्ती ( भाग -1) द्वारा Vishakha Pareek जग्गू - द डिटैक्टिव - 1 द्वारा Rakesh Kumar Sharma आज्ञा द्वारा Rajeev kumar पता बताते दिन द्वारा महेश रौतेला तुम हो तो सब कुछ है - भाग 1 द्वारा Ankit Khatri मेरी जिंदगी का सफर 1 द्वारा Ankit Khatri अहमदाबाद के चर्चे द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी