कहानी एक पल की है, जिसमें अनी को समझ नहीं आ रहा कि उसे क्या करना चाहिए। वह अपने पिता से मर्सिडीज कार के लिए कुछ मांगने के बारे में सोच रही है, लेकिन उसे यह समझ नहीं आ रहा कि कैसे बोले। कहानी में समीर का भी जिक्र है, जो हमेशा उसके लिए मौजूद रहता है। स्वाभिमान - लघुकथा - 55 Nisha chandra द्वारा हिंदी लघुकथा 11.6k 2.7k Downloads 9.5k Views Writen by Nisha chandra Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण क्या करे अनी, समझ नहीं पा रही है ।क्या पापा से मर्सिडिज के लिए बोल दे या हमेशा के लिए समीर को छोड़कर पिता के घर चली जाये। इकलौती सन्तान है और करोड़ो की वारिस, पिता से कहकर मर्सिडिज मँगवाना उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं है, पर ये व्यक्ति इतना बड़ा लालची निकलेगा ये अनी ने कभी सपने में भी न सोचा था । इसी के लिए वह माँ-बाप के सामने इतना रोयी थी, प्यार की दुहाई दी थी, हजार मिन्नतें की थी। More Likes This किराए का घर द्वारा Vandna Sharma First Love - 1 द्वारा Sah Ankita जिस जीवन में तुम थे - 2 द्वारा SHREYA INDUSHREE तुम्हें भी तो याद आती होगी - 1 द्वारा Anil Kundal मेरा साहित्य लेखन द्वारा Rakesh Kumar Sharma अलविदा आनंद! द्वारा Devendra Kumar आग और ठहराव - 1 द्वारा Alka rahul Aggarwal अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी