हिम स्पर्श - 9 Vrajesh Shashikant Dave द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

हिम स्पर्श - 9

Vrajesh Shashikant Dave मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी उपन्यास प्रकरण

9 जब वफ़ाई जागी तब प्रभात हो चुका था, सूरज अभी अभी निकला था। धूप की बाल किरनें कक्ष में प्रवेश कर चुकी थी। प्रकाश मध्धम था। सूरज की किरणें दुर्बल सी थी। लगता था सूरज किसी के पीछे ...और पढ़े