एक महिला सड़क पर बांधकर खड़ी है, उसका माथा लहुलुहान है और रक्त उसके गले से बह रहा है। वह सहायता की गुहार लगा रही है, लेकिन उसकी स्थिति अत्यंत दयनीय है। तभी कुछ लोग चिल्लाते हैं कि उन्हें उसके दाहिने और बाएं हाथ चाहिए। एक व्यक्ति पूछता है कि वे उसके हाथ लेकर क्या करेंगे, जिससे स्थिति की गंभीरता और भी स्पष्ट होती है। यह दृश्य मानवता की विफलता और बर्बरता को उजागर करता है। स्वाभिमान - लघुकथा - 8 Anagha Joglekar द्वारा हिंदी लघुकथा 4.5k 1.9k Downloads 7.5k Views Writen by Anagha Joglekar Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण पहले कुछ धुंधला-सा दिख रहा था लेकिन अब सब स्पष्ट दिख रहा है। एक औरत को बीच सड़क पर बाँधकर खड़ा किया गया है। वह मुँह झुकाए खड़ी है। उसका 'माथा' लहुलुहान है। उसके 'गले' के पास से रक्त बह रहा है जिससे आस-पास की जमीन लाल हो चली है। उसका स्वाभिमान छिन्न-भिन्न हो चुका है। अब वह लाचार हो अपने दोनों हाथ फैलाकर सहायता की गुहार लगा रही है। More Likes This नेहरू फाइल्स - भूल-113 द्वारा Rachel Abraham प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी