रीतिका रोज़ कार्यालय जाने के रास्ते में एक बुजुर्ग व्यक्ति को देखती थी, जो बस की प्रतीक्षा में खड़ा रहता था। उसकी जिज्ञासा इस बुजुर्ग के प्रति बढ़ती गई, लेकिन वह कभी उससे बात नहीं कर पाई। एक दिन लिफ्ट में यात्रा करते समय, रीतिका ने उस बुजुर्ग को देखा, लेकिन उसे पूछने का मौका नहीं मिला। उसने सोच लिया कि अगले दिन बस स्टैंड पर उससे मिलेगी। अगले दिन उसने बुजुर्ग को दूर से देखा, लेकिन जब वह उसके पास जाने लगी, तब वह वहाँ नहीं था। रीतिका ने निराश होकर अपनी कार में बैठ गई, और उसके मन में बार-बार उस बुजुर्ग का ख्याल आता रहा। यह कहानी जिज्ञासा, अनजान संबंधों और मन की एक अनकही बेचैनी का चित्रण करती है। सूखा पेड़ Ved Prakash Tyagi द्वारा हिंदी लघुकथा 45.1k 4.7k Downloads 29.5k Views Writen by Ved Prakash Tyagi Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण घर पर दोनों अकेले रहते थे, कोई पूछने वाला भी नहीं था और यह भी चिंता नहीं होती थी कि कोई घर पर प्रतीक्षा कर रहा है अतः दोनों ज्यादा से ज्यादा समय एक साथ बिताने लगे, कभी आइस क्रीम पार्लर में, कभी किसी रैस्टौरेंट में और कभी कभी पिक्चर देखने में ........ More Likes This पढ़ाकू द्वारा Vandna Sharma कोन्निचिवा: माय देसी लव - 1 द्वारा Kajal Soam किराए का घर द्वारा Vandna Sharma First Love - 1 द्वारा Sah Ankita जिस जीवन में तुम थे - 2 द्वारा SHREYA INDUSHREE तुम्हें भी तो याद आती होगी - 1 द्वारा Anil Kundal मेरा साहित्य लेखन द्वारा Rakesh Kumar Sharma अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी