यह कहानी "धुंवे की लकीर" में एक माँ रामवती और उसकी बेटी रमा के जीवन के एक साधारण लेकिन महत्वपूर्ण पल को दर्शाया गया है। रमा जब चूल्हे में आग नहीं जला पाती, तो उसकी माँ उसे फूंकनी का उपयोग करने की सलाह देती हैं। इस बीच, रामवती को पेट में समस्या होती है और वह शौच के लिए खेत की ओर दौड़ पड़ती हैं। जब वह खेत में जाती हैं, तब कालु नामक एक व्यक्ति उन पर नज़र रखता है और देखता है कि रामवती अर्धनग्न हैं। यह देखकर वह सोचता है कि यह एक पाप है। रामवती को कालु की उपस्थिति का एहसास नहीं होता और वह जल्दी से वहां से निकल जाती हैं। घर पर लौटकर, वह अपनी बेटी से पानी मांगती हैं और अपने हाथ धोती हैं। इस तरह, कहानी ग्रामीण जीवन की साधारणता और सामाजिक मान्यताओं को उजागर करती है। धुंवे की लकीर Ved Prakash Tyagi द्वारा हिंदी लघुकथा 29k 1.4k Downloads 4.9k Views Writen by Ved Prakash Tyagi Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण अनुज अनुज! देखो तुम्हारे गाँव से आसमान की तरफ धुंवे की कितनी मोटी लकीर बन गयी है। रीना ने अनुज को आवाज लगाकर बताया तो अनुज बोला, रीना तुम गाँव देखने आई थीं न, अब तुम्ही देखो, मैं तो यह लकीर बचपन से देखता आया हूँ। More Likes This पहली मुलाक़ात - 1 द्वारा puja नेहरू फाइल्स - भूल-113 द्वारा Rachel Abraham प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी