कहानी एक व्यक्ति के अस्पताल में दाखिल होने और उसकी बीमारी के दौरान की है। वह छठे दिन बेहोशी की हालत में था, जबकि डॉक्टरों ने उसकी उम्मीद छोड़ दी थी। लेकिन फिर उसे ठीक होने का मौका मिला। इस दौरान, उसे यह नहीं पता था कि कौन उससे मिलने आया और कौन गया, लेकिन उसके दोस्तों और परिवार के लोग उसके बिस्तर के पास इकट्ठा होते रहे और उसके लिए दुख व्यक्त करते रहे। जब उसकी तबीयत थोड़ी ठीक हुई, तो उसने अपने आसपास का अवलोकन करना शुरू किया। वह जनरल वार्ड में था और उसके बिस्तर के पास चिकित्सा उपकरणों और दवाओं से भरी एक अलमारी थी। वार्ड में कई नर्सें थीं जो दिन और रात बारी-बारी से ड्यूटी करती थीं। रात के समय उसे नींद नहीं आती थी, लेकिन कभी-कभी वह इधर-उधर देखता था। विशेष रूप से रात की ड्यूटी पर एक नर्स थी, जो उसकी विशेषता के कारण उसे बहुत साधारण लगती थी। उसकी विशेषताएँ और व्यक्तित्व के बारे में लेखक ने कुछ विचार किए हैं, यह दर्शाते हुए कि वह किस तरह से उसे प्रभावित करती है। यह कहानी अस्पताल के अनुभव और जीवन के अनिश्चितता को दर्शाती है। घोगा Saadat Hasan Manto द्वारा हिंदी लघुकथा 5.2k 3.3k Downloads 9.2k Views Writen by Saadat Hasan Manto Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण मैं जब हस्पताल में दाख़िल हुआ तो छट्ठे रोज़ मेरी हालत बहुत ग़ैर होगई। कई रोज़ तक बे-होश रहा। डाक्टर जवाब दे चुके थे लेकिन ख़ुदा ने अपना करम किया और मेरी तबीयत सँभलने लगी। इस दौरान की मुझे अक्सर बातें याद नहीं। दिन में कई आदमी मिलने के लिए आते। लेकिन मुझे क़तअन मालूम नहीं, कौन आता था, कौन जाता था, मेरे बिस्तर-ए-मर्ग पर जैसा कि मुझे अब मालूम हुआ, दोस्तों और अज़ीज़ों का जमघटा लगा रहता, बाअज़ रोते, बाअज़ आहें भरते, मेरी ज़िंदगी के बीते हुए वाक़ियात दुहराते और अफ़सोस का इज़हार करते। Novels मंटो की चुनिंदा कहानियाँ नाज़िम जब बांद्रा में मुंतक़िल हुआ तो उसे ख़ुशक़िसमती से किराए वाली बिल्डिंग में तीन कमरे मिल गए। इस बिल्डिंग में जो बंबई की ज़बान में चाली कहलाती है, नि... More Likes This मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 1 द्वारा Std Maurya ऐसे ही क्यों होता हैं? - 1 द्वारा Std Maurya एक डिवोर्स ऐसा भी - 1 द्वारा Alka Aggarwal पहली मुलाक़ात - 1 द्वारा puja नेहरू फाइल्स - भूल-113 द्वारा Rachel Abraham प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी